Happiness

Happiness

छत पर रात हमारा चाँद नहीं आया हम कितने तारे गिन पाए याद नहीं शिकवा ,गिला करना बेमानी लगता है हमने कितने दर्द छुपाए याद नहीं पत्थर भी फूलों जैसे लगते थे हमें कब,किसने, कितने बरसाए याद नहीं उसकी चाहत को छूने की हसरत में हमने कितने पर फैलाए याद नहीं #गोविन्द गुलशन

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mdtsfrj‎‏اداس دل ھے مگر ہر کسی سے ہنس کے ملتے ہیں ‎‏یہی ایک فن سیکھا ھے بہت کچھ کھونے کے بعد

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