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कोई डूबता तो कोई उभरता चला गया कोई फूल बनकर महेकता चला गया हर मोड दुनिया का सबर आज़माता रहा तैर गया दरिया जो भँवर चीरता चला गया ददॅ सीने से लगाए बेमिसाल हुआ परवाना कहर-आलूदा शमाअ में जलता चला गया
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